मुसलमानों को न्याय मिले बिना भारत नहीं बन सकता विश्वगुरु : असदुद्दीन ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में गुजरात के भुज में आयोजित एक जनसभा में कहा कि भारत तब तक ‘विश्वगुरु’ नहीं बन सकता जब तक मुसलमानों को न्याय नहीं मिलता। उन्होंने स्थानीय चुनावों से पहले समुदाय के भीतर राजनीतिक नेतृत्व को मजबूत करने की अपील की। ओवैसी ने जोर दिया कि अल्पसंख्यकों को न्याय और समानता का अधिकार मिलना आवश्यक है, अन्यथा भारत की वैश्विक शक्ति बनने की योजना अधूरी रह जाएगी।
एआईएमआईएम उम्मीदवारों का समर्थन करें
ओवैसी ने मतदाताओं को भुज नगरपालिका और अन्य तालुका पंचायतों में एआईएमआईएम के उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वे एआईएमआईएम के खिलाफ झूठी अफवाहें फैलाने का काम कर रहे हैं। एमआईएम प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र को मजबूत करने और संविधान में जनता के विश्वास को बढ़ाने के लिए काम कर रही है।
बीजेपी और UCC का विरोध
अहमदाबाद में एक चुनावी रैली में ओवैसी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर भाजपा की कड़ी निंदा की। उन्होंने समुदाय से अनुरोध किया कि वे बुद्धिमानी से अपने वोट का इस्तेमाल करें और भाजपा के खिलाफ मतदान करें। ओवैसी ने कहा कि भाजपा ने मुसलमानों की शरीयत को चुनौती दी है और UCC को लागू कर के वे मुसलमानों के अधिकारों को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं।
सोच-समझ कर करें मतदान
ओवैसी ने मतदाताओं से अपील की कि वे 26 अप्रैल को मतदान करने से पहले सोच-समझ कर फैसला करें। उन्होंने कहा कि भाजपा का UCC बिल संवैधानिक सुरक्षाओं के खिलाफ है और समुदाय ऐसे किसी भी कानून को कानूनी रूप से चुनौती देगा। उन्होंने विवाह, तलाक और विरासत जैसे मामलों में समान कानूनी ढांचा लागू करने के लिए उठाए गए कदमों पर भी सवाल उठाया।
भाजपा के खिलाफ एकजुटता जरूरी
ओवैसी ने कहा कि जब तक देश के मुसलमानों को उनके अधिकार नहीं मिलते, तब तक भारतीय लोकतंत्र की नींव कमजोर रहेगी। उन्होंने भाजपा का मुकाबला करने के लिए मुस्लिम समुदाय से एकजुट होकर चुनावी मैदान में आने का आह्वान किया। उनका मानना है कि एकजुटता से ही मुसलमान अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा कर सकेंगे।
गुजरात राज्य में बदलाव की आवश्यकता
ओवैसी ने गुजरात में राजनीतिक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान और अन्य अल्पसंख्यक एकजुट होकर वोट देते हैं, तो वे अपनी आवाज को बुलंद कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा में अपनी भागीदारी बढ़ाई जाए, तो इससे राज्य का विकास संभव हो सकेगा।
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